नई दिल्ली । महज दो से ढाई महीने में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में 50 फीसद सीटों पर कांग्रेस महिला एवं युवा चेहरों पर दांव लगाएगी। शेष 50 फीसद सीटों पर अच्छी छवि वाले दिग्गजों को चुनावी रण में उतारा जाएगा। वहीं प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित के निधन के बाद काफी समय तक निष्क्रिय पड़ी रही कांग्रेस की दिल्ली इकाई अब चुनावी मोड़ में आ चुकी है। अध्यक्ष पद पर वरिष्ठ एवं अनुभवी नेता सुभाष चोपड़ा की नियुक्ति के साथ ही तमाम वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता फिर से सक्रिय हो गए हैं और आए दिन धरना-प्रदर्शन, कार्यकर्ता सम्मेलन और बैठकों के जरिये अपनी उपस्थिति भी बखूबी दर्ज करा रहे हैं। इसी कड़ी में पार्टी ने अब विधानसभा चुनाव की बिसात के लिए अपने मोहरे भी बैठाने शुरू कर दिए हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव को पूरी मुस्तैदी और मजबूती से लड़ना चाहती है। इसीलिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर विचार-विमर्श एवं मंथन का दौर भी शुरू हो गया है।

पहले चरण में तय किया गया है कि 50 फीसद सीटों पर नए चेहरों को टिकट दिया जाए। इनमें महिलाएं और नौजवान दोनों ही शामिल रहेंगे। इससे पार्टी को बड़ा फायदा यह होगा कि जो कार्यकर्ता पार्टी से छिटक रहे हैं, वह वापस लौटेंगे। आम आदमी पार्टी एवं भाजपा की नए चेहरों पर दांव खेलने की नीति को ध्यान में रखते हुए भी कांग्रेस के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया है।

आधी सीटों पर पार्टी दिग्गजों का भी साथ छोड़ना नहीं चाह रही। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व पार्षद समेत कई नेता जिनकी अपने विधानसभा क्षेत्र में ठीक- ठीक छवि है उनको टिकट दिया जाएगा।

दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष ने स्वयं चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अगर वह भी चुनाव लड़ गए तो बाकी सीटों पर ध्यान दिया जाना संभव नहीं रह जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा चुनाव नहीं लड़ेंगे चुनाव, बनी रणनीति

सुभाष चोपड़ा (अध्यक्ष, दिल्ली कांग्रेस) के मुताबिक, उम्मीदवारों का चयन तो समय आने पर ही किया जाएगा, लेकिन यह तय है कि 35 सीटों पर महिला एवं युवा लड़ेंगे जबकि 35 सीटों पर पुराने नेता। टिकटों के वितरण में कोई भ्रष्टाचार नहीं होगा। जहां तक मेरा सवाल है तो मेरे लिए चुनाव लड़ने से ज्यादा महत्वपूर्ण है पार्टी को मजबूत करना व चुनाव में उसे विजय दिलाना।