राजस्थान के महान ज्योतिषी पं० एच० आर० शास्त्री ने शनि ग्रह के विषय में व्याख्या की है कि शनि ग्रह ही नहीं मुख्य न्यायाधीश भी है। आज का जन मानस शनि ग्रह से इतन भयभीत है कि इसका नाम सुनते ही मनुष्य के पसीने छुटने लगते हैं। यह ग्रह बड़े-बड़े राजाओं को अपना क्रूर प्रभाव प्रत्यक्ष दिखा चुका है। जो सर्व विदित है। राजा विक्रमादित्य, राजा नल दमंयन्ति, राजा हरिशचन्द्र इत्यादि अनेकों उदाहरण स्वरूप शनि ग्रह से पीड़ित रह चुके हैं। शनि ग्रह सूर्य का पुत्र है। इनकी माता का नाम स्वर्णा है तथा इन्होंने गुरु दीक्षा भगवान शिव से ग्रहण की है। शनि देवता बचपन से ही उदण्डी रहे हैं। इनके छः भाई-बहिन और भी हैं।

इनकी उदण्डता से परेशान होकर पिता सूर्य व माता स्वर्णा ने इनको भगवान शिव के पास दीक्षाप्राप्ती के लिए भेज दिया दीक्षा प्राप्ती के उपरान्त एक रोज भगवान शिव ने अपने शिष्य शनि से पूछा कि आप इतने उदण्डी व क्रूर क्यों हैं तो शनि देवता ने कहा कि गुरुवर यह मेरा स्वभाव है मेरी दृष्टि जिस मनुष्य पर पड़ जाये व अनेक परेशानीयों से घिर जाता है तथा उसका सुखी जीवन दुखोः में बदल जाता है ओर मेरी पूर्ण दशा साढ़े सात वर्ष की होती है। छोटी दशा ढाई वर्ष की होती है और विशोन्तरी महादशा 19 वर्ष की होती है। इतना कहकर शनि देव ने कहा कि गुरुवर कल मैं आपके ऊपर ढाई पहर यानि के 7 घंटा 30 मिनट दशा के रूप में आऊँगा।

इतना कहकर शनि देव चले गये अगले दिन भगवान शिव को शनि का भय इतना सताने लगा कि वे कैलाश छोड़कर जंगल में जागकर हाथी का रूप धारण कर सारे दिन जंगल में खड़े रहे जब सांयकाल कैलाश पहुँचे तो शनि देव वहाँ उपस्थित थे तो भगवान शंकर जी ने पूछा कि शनि देव आप तो मेरे पे दशा के रूप में आने वाले थे उसका क्या हुआ तो शनि देव कहने लगे कि हे गुरुवर आप मेरे डर सारे दिन हाथी बनकर जंगल में खड़े रहे और कह रहे हैं अब भी कुछ बाकी है इसी ढाई घड़ी पशु योनि में होने के कारण भगवान शिव को पशुपतिनाथ के नाम से जाना जाता है।

शनि ग्रह का पर्थक-पर्थक राशियों पर प्रभाव 24-1-2020 माघ कृष्णा अमावश शुक्रवार मकर राशि स्थित चंद्रमा में शनि अपनी स्व राशी मकर में प्रवेश करेंगें शनिदेव के मकर राशी में आने से कुम्भ राशी वाले जातकों को शनि साढ़ेसाती आरम्भ हो जायेगी। शनि देव की साढ़ेसाती कुम्भ, मकर और धनु राशी पर रहेगी मिथुन और तुला राशी को ढइया यानि ढाई शाल शनि की दशा रहेगी मेष, कर्क, वृश्चिक राशी वालों को शनिदेव तांबा के पाये शुभ और लाभ दायक रहेंगे। वृष, कन्या, धनु राशी वालों को शनि देव चांदी के पाया रहेंगे- जो धन वृद्धि व्यापार वृद्धि नौकरी में परमोशन आदि करायेंगें, मिथुन, तुला, कुम्भ राशी वालों को शनिदेव लोहे के पाया रहेंगें – जो कष्ट पिड़ा अकस्मात दुर्घटना, धन, हानि मान हानि आदि कराता है।

सिंह, मकर, मीन राशी वालों को शनि देव सोना के पाये रहेंगें – जो धन-हानि नौकरी में बाधा, रोजगार में परेशानी कराता है। मेष- राशी वाले जातक जातिकाओं के लिए शनि-देव पराक्रम में वृद्धि भाई-बन्धुओं से लाभ दैनिक रोजगार में लाभ नौकरी में परमोशन राजनीति में पद् वृद्धि पति पत्नि में मधुर सम्बन्ध और प्रेमी-प्रेमीका में गहरे प्रेम सम्बन्ध बनेगें बिछड़े प्रेमी प्रेम का फीर मिलेंगें।

वृष:-राशी वाले जातक जातिकाओं के लिए शनिदेव मित्रो से लाभ-मान सम्मान में वृद्धि रोग, बिमारी शत्रु परास्त ऋण धन हानि से निजाकत मिलेगी धन-लाभ व्यापार में लाभ नौकरी में तरक्की मिलेगी।
मिथुनः-राशी जातक जातिकाओं के लिए शनिदेव धन हानि कुटुम्ब से क्लेश बुद्धि का विनाश विद्या में हानि पढ़ाई में रूकावट संन्तान सुख में बाधा, सन्तान की तरफ से परेशानी बढ़ेगी, रोजगार नौकरी छुटने का योग भी बनवातेहै। पिता को कष्ट पिड़ा-पिता से विवाद पिता सुख से वंचित भी होना पड़ सकता है।

कर्क:-राशी वाले जातक जातिकाओं के लिए शनिदेव दैनिक रोजगार में लाभ, नौकरी में तरक्की पत्नी से मधुर मिलन, इस समय अवधि में जिनकी शादी
नहीं हो रही। उनकी शादी शीघ्र होगी। भूमि मकान, वाहन आदि का लाभ होगा माता पक्ष से मधुरता बढ़ेगी धर्म में आस्था बढ़ेगी किसी धार्मिक देवालय आदि पर पैसा खर्च होगा।

सिंहः- राशी वाले जातक जातिकाओं के लिए शनिदेव भाईयों से विरोध मित्रों व रिश्तेदारों से मन मुटाव, रोग, रिण व शत्रुओं की वृद्धि होगी कष्ट पिड़ा बढ़ेगी कोर्ट कचरी में विवाद बढ़ सकता है। अकस्मात दुर्घटना घटने का योग बनता है। कष्ट पिड़ा बढ़ेगी अकस्मात मत्युयोग भी बन सकता है।

कन्या:- राशी जातक व जातिकाओं के लिए शनि देव धन वृद्धि कुटुम्ब से प्रेम परिवार से लाभ विद्या व सन्तान सुख में वृद्धि सन्तान की तरफ से शुभ समाचार प्राप्त होगा। स्त्री सुख प्राप्त होगा। विवाहिक सुख प्राप्त होगा। प्रेमी-प्रेमिका का शीघ्र मिलन होगा।

तुला:- राशी जातक-जातिकाओं के लिए शनिदेव व वाहन से दुघर्टना मकान, भूमि आदि से नुकसान माता को कष्ट रोग पीड़ा बढ़ेगी माता का देहान्त भी हो सकता है। रोग, रिण, शत्रु वृद्धि व्यापार में हानि धन का नुकसान पिता से मन मुटाव पिता सुख से वंचित भी होना पड़ सकता है। कोर्ट कचेरी में विवाद मुकद्मा भी लग सकता है।

वृश्चिक:- राशी जातक-जातिकाओं के लिए शनि देव भाई बन्धुओं से लाभ मित्रों से मिलन पराक्रम में वृद्धि और विद्या में लाभ संन्तान सुख में लाभ सन्तान को तरक्की पुत्र प्राप्ति के योग बनते है। विदेश यात्रा से लाभ मिलेगा तीर्थ यात्रा के भी योग बनते हैं।

धनुः- राशी जातक जातिकाओं के लिए शनि देव धन की वृद्धि, व्यापार में लाभ नौकरी में तरक्की वाहन सुख-भूमि भवन से लाभ नया मकान या वाह न लेने का योग बनता है। माता सुख में वृद्धि होगी आयु में वृद्धि होगी रोग कष्टों से मुक्ति मिलेगी अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होगें।

मकर:-राशी जातक जातिकाओं के लिए शनिदेव कष्ट पिड़ा स्वास्थय में परेशानी कोई आरोप भी लग सकता है। भाइयों से विरोध मित्रों से धोखा मिल सकता है। पत्नी को कष्ट पिड़ा बढ़ेगी रोजगार में हानि नौकरी में परेशानी बढ़ेगी कर्म व रोजगार में बाधा बढ़ेगी कोर्ट कचेरी में विवाद होने का योग बनता है। पिता को कष्ट पिड़ा बढ़ेगी।

कुम्भ – राशी जातक-जातिकाओं के लिए शनिदेव धन-हानि, विदेश में हानि घर से दूर रहना पड़ सकता है। कुटुम्ब से क्लेश, थाना, कचेरी में विवाद बढ़ सकता है। शत्रु वृद्धि रोग, कष्ट बिमारी में पैसा खर्च होगा। शत्रुओं से भय बना रहेगा। धर्म में रूची हटेगी भाग्य में बाधा रहेगी धार्मिक कार्यो में रूकावट आयेगी।

मीनः- राशी जातक जातिकाओं के लिए शनि देव स्वास्थय में परेशानी शरीर में पिड़ा मानसिक तनाव कमर दर्द घुटनों की परेशानी बढ़ेगी। विद्या में नुकसान पढ़ाई छुट सकती है। मानसिक रोग बढ़ सकता है। सन्तान सुख में बाधा अकस्मात दुर्घटना कष्ट पीड़ा, बैड रेस्ट भी करना पड़ सकता है। अकस्मात झगड़ा फसाद भी होना पड़ सकता है। विभिन्न प्रकार से धन हानि के योग बनते है।

शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए महत्वपूर्ण उपायः-
1. शनिदेव के मन्दिर में जाकर प्रणाम करना, तेल का दीपक जलाना, चने गुड़ या रेवड़ी का भोग लगाना, शनि चालीसा या शनि कथा का पाठ करना इत्यादि।
2. अपने बराबर वजन का आटा तोलकर गुड़ मिलाकर सरसों का तेल में गुलगुले बनाकर बन्दरों या कोड़ीयों को खिलाना इत्यादि।
3. अपने घर या व्यापार स्थल पर शनि पुजारी से शनि कथा का पाठ कराना।
4. सतनजा, काला कम्बल, काली छत्तरी, काला जूता, सरसों का तेल शनिवार को दान करना।
5. शनि शान्ति के लिए 23000 पाठ प्रति वर्ष कराना।
6. पिपलेश्वर देव की पूजा कर उषा काल में पिपल के नीचे तेल का दीपक जलाना इत्यादि।
7. 41 दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना, ब्रह्मचारी रहना, मांस मन्दिरा का सेवन ना करना, शनि देवता से पिड़ित जातक जातिकाएं अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें।
शास्त्री जी की ज्योतिष गणना के अनुसार आयोध्या में राम मन्दिर का निर्माण 24.01.2020 शनिदेव के मकर राशी पर आने से होगा। भूमि शिलान्यास मन्दिर निर्माण कार्य 02.04.2020 रामनवमीं से आरम्भ होगा।

अखिल भारतीय भृगुवंशी भार्गव जोषी, महासंघ
( रजि नं० 3072)
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